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यज्ञसेना या जानकी

यज्ञसेना या जानकी 



एक यज्ञ से उत्पन्न यज्ञसेना, दूसरी भूमि पुत्री जानकी 

एक यज्ञ आहुति से पवित्र, दूसरी जगत जननी सी पावनी

 एक के कुल की मर्यादा ने ,खुद की मर्यादा ही छीन ली

 दूसरे ने कुल के खातिर ,खुद का अस्तित्व ही त्याग दिया

                                     अब बताओ आप सब कौन गलत, कौन सही

 यज्ञ से उत्पन्न यज्ञसेना, सूर्य समान आभा भरी

 रूप उसका ऐसा मानो ,स्वयं चांद की हो चांदनी

 अग्नि से पवित्र ,परंतु खुद के लोगों ने ही छीनी उसकी सारी हर हंसी 

भरी समाज में ,किया उसका हर संभव अपमान 

कुचल डाली सारी कोमलता ,पर कोई ना बचा पाया उसका सम्मान 

क्या यह थी उसकी गलती ,जो बनी महाभारत कि वह सूत्रधार 

                                अब बताओ सब कौन गलत, कौन सही 

वही जनक नंदिनी राजरानी जानकी, मां वसुधा सीता 

परम पूज्य, पुरुषों में पुरुषोत्तम राम की सीता 

जिन्होंने शबरी और अहिल्या से स्त्रियों को तारा 

पर गया कहा उनका पुरुषत्व, जब सवाल खुद की पत्नी का आया

क्या समझ ना थी, कि किसी के कह देने मात्र से अग्नि अशुद्ध नहीं होती 

फिर क्यों किया वह तिरस्कार ,जो माता जानकी को देनी पड़ी अपनी जान 

                    अब ना पूछूंगी, बताओ कौन गलत ,कौन सही 

                    परंतु प्रश्न यह है कि, क्यों केवल हर हालत में पुरुष ही सही 

                    कुल का मान सम्मान बचाते स्त्री कर जाती अपने प्राणों तक का बलिदान 

                    परंतु फिर भी क्यों नहीं दे पाता यह समाज, उसे स्त्री होने का सम्मान

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